न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने किया उद्घाटन, दिल्ली सरकार की सचिव डॉ. रश्मि सिंह की उपस्थिति में हुआ समापन; आठ सत्रों में वैश्विक शांति, मानवाधिकार, महिला अधिकार, बंदियों के अधिकार, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण और सामाजिक न्याय पर हुआ मंथन
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026। विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद (WHRRC) द्वारा 25 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन 2026 का आयोजन किया गया। न्याय, शांति, मानव गरिमा, समानता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित इस अधिवेशन का उद्घाटन भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने किया। समापन सत्र में दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. रश्मि सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। आयोजन में न्यायपालिका, विधि, शिक्षा, कूटनीति, सामाजिक सेवा और अंतरराष्ट्रीय नीति के क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने सहभागिता की। आयोजकों के अनुसार, लगभग दस देशों के प्रतिनिधियों सहित करीब 80 विद्वानों ने आठ सत्रों में विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
उद्घाटन समारोह एवं वैश्विक शांति पर आधारित पहले सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी, चेयरपर्सन के रूप में भारत के पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त यशवर्धन कुमार सिन्हा तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. संदीप मारवाह, यूनाइटेड किंगडम की अंतरराष्ट्रीय मीडिएटर डॉ. रेणु राज, आध्यात्मिक गुरु आचार्य डॉ. लोकेश मुनि, डॉ. एच. एस. रावत और श्री नवनीत राणा ने सहभागिता की। वक्ताओं ने विश्व शांति, मानव गरिमा, आपसी सद्भाव, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार प्रस्तुत करते हुए वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया। WHRRC की ब्रांड एंबेसडर करिश्मा हाड़ा ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मानवाधिकारों पर आधारित दूसरे सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी तथा चेयरपर्सन के रूप में अंतरराष्ट्रीय मीडिएटर डॉ. रेणु राज उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में यूएनएडीएपी के कार्यकारी निदेशक डॉ. डोमिनिक एफ. डिक्सन, ईरान के दूतावास के प्रतिनिधि डॉ. ओमिद बाबेलियन, विधि विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन जोशी, मानवाधिकार कार्यकर्ता हुकुम सिंह, विधि विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) राजकुमार तिवारी तथा वतन केसरी समाचार पत्र के प्रमुख श्री कुलदीप सोनी शामिल रहे। वक्ताओं ने मानवाधिकारों के संरक्षण, नागरिकों की गरिमा, न्याय तक पहुंच, समानता और अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर विश्व का ध्यान आकर्षित किया। इस सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि मानवाधिकारों का वास्तविक संरक्षण तभी संभव है, जब कानूनी प्रावधानों को व्यवहार में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। WHRRC की चेयरपर्सन डॉ. ज्योति जोंगलूजू ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
महिला अधिकारों पर आधारित तीसरे सत्र में नागालैंड राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन डब्ल्यू. एन. कोन्याक मुख्य अतिथि तथा पश्चिम बंगाल राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव हृषिकेश मुड़ी चेयरपर्सन के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (यूएन-ईसीओएसओसी) से संबद्ध सलाहकार राजश्री चौधरी, युवा प्रतिनिधि अनन्या नेगी, WHRRC की चेयरपर्सन डॉ. ज्योति जोंगलूजू, परिषद की सचिव रश्मि बाला तथा विधि विशेषज्ञ रंजना दीक्षित शामिल रहीं। वक्ताओं ने महिलाओं की सुरक्षा, समान अवसर, लैंगिक समानता, कानूनी संरक्षण और निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया। महिला सशक्तीकरण के लिए विधिक जागरूकता, संस्थागत जवाबदेही और सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। परिषद की सचिव रश्मि बाला ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
बंदियों के अधिकारों पर आधारित चौथे सत्र में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के स्पेशल काउंसल डॉ. मनोज गोर्केला मुख्य अतिथि तथा सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ए. पी. एस. अहलूवालिया चेयरपर्सन के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में पश्चिम बंगाल राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव हृषिकेश मुड़ी, दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग के अधीक्षक जौरावर सिंह, तिहाड़ जेल, दिल्ली के पूर्व विधि अधिकारी सुनील कुमार गुप्ता, विधि विशेषज्ञ मनोज सिन्हा, सामाजिक कार्यकर्ता ललित सुखवाल और श्री बंशीधर तथा WHRRC के मीडिया प्रकोष्ठ के चेयरपर्सन डॉ. शूलपाणि सिंह शामिल रहे। वक्ताओं ने बंदियों के मानवाधिकारों, हिरासत के दौरान मानवीय गरिमा, न्यायपूर्ण व्यवहार और विधिक संरक्षण की आवश्यकता पर विश्व का ध्यान आकर्षित किया। इस बात पर विशेष बल दिया गया कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित होने के बावजूद उसके मूल मानवाधिकारों का सम्मान किया जाना आवश्यक है। ललित सुखवाल ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
शिक्षा के अधिकारों पर आधारित पांचवें सत्र में पद्मश्री सम्मानित एवं राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के पूर्व निदेशक जे. एस. राजपूत मुख्य अतिथि तथा सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ए. पी. एस. अहलूवालिया चेयरपर्सन के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में उपभोक्ता न्यायाधीश डॉ. संदीप कुमार पांड्या, सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड राजेश्री रेड्डी, विधि विशेषज्ञ डॉ. आर. एस. चौहान, सामाजिक कार्यकर्ता विमल सिंह, उर्मिला मेहता और ललिता जेडिया तथा मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. कमलाकर सिंह शामिल रहे। वक्ताओं ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान शैक्षणिक अवसर, शिक्षा तक समावेशी पहुंच और सामाजिक असमानताओं को कम करने में शिक्षा की भूमिका पर वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया। शिक्षा को जागरूक नागरिकता, सामाजिक विकास और मानव गरिमा की आधारशिला के रूप में रेखांकित किया गया। ललिता जेडिया ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
खाद्य सुरक्षा पर आधारित छठे सत्र में उपभोक्ता न्यायाधीश डॉ. संदीप कुमार पांड्या मुख्य अतिथि तथा सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता टी. गीता चेयरपर्सन के रूप में उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में विधि विशेषज्ञ डॉ. भरत कुलकर्णी, सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड राजेश्री रेड्डी, सामाजिक कार्यकर्ता पी. एस. बघेल और दामित गेहलोत तथा विधि विशेषज्ञ विक्रम सिंह राठौड़ और राजेंद्र सिंह राठौड़ शामिल रहे। वक्ताओं ने खाद्य सुरक्षा, उपभोक्ता अधिकारों, नागरिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षित खाद्य व्यवस्था और उपभोक्ता जागरूकता जैसे विषयों पर विश्व का ध्यान आकर्षित किया। खाद्य सुरक्षा को जनस्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता और सामाजिक कल्याण से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए जवाबदेह व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया गया। राजस्थान सामाजिक न्याय प्रकोष्ठ की प्रदेश चेयरपर्सन रमा अग्निहोत्री ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
पर्यावरण संरक्षण पर आधारित सातवें सत्र में कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप पगारिया मुख्य अतिथि तथा सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता टी. गीता चेयरपर्सन के रूप में उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में अंतरराष्ट्रीय मीडिएटर डॉ. रेणु राज, जलवायु विशेषज्ञ डी. के. जैन, विधि विशेषज्ञ नवीन कुमार शेलार, सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार, आध्यात्मिक गुरु मनवेंद्र सिंह रावत और विधि विशेषज्ञ श्री मोहम्मद सलाम शामिल रहे। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संबंधी चुनौतियों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भावी पीढ़ियों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विश्व का ध्यान आकर्षित किया। पर्यावरणीय संतुलन को मानव जीवन, स्वास्थ्य, आजीविका और सतत विकास से जोड़ते हुए जन-जागरूकता तथा सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। पंजाब मीडिया प्रकोष्ठ के प्रदेश चेयरपर्सन राजेश कुमार अमला ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समापन समारोह एवं सामाजिक न्याय पर आधारित आठवें सत्र में दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. रश्मि सिंह मुख्य अतिथि तथा WHRRC के सामाजिक न्याय प्रकोष्ठ के नेशनल चेयरपर्सन अशोक कुमार योगी चेयरपर्सन के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता मंजू व्यास और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी डॉ राहुल कुमार ने सहभागिता की। वक्ताओं ने सामाजिक न्याय, समान अवसर, वंचित समुदायों के अधिकारों, सामाजिक समावेशन और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर विश्व का ध्यान आकर्षित किया। अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन, सामाजिक असमानताओं को दूर करने और समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। अशोक कुमार योगी ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अधिवेशन के समापन की घोषणा की।
अधिवेशन के दौरान देश-विदेश के 15 विशिष्ट नागरिकों को उनके योगदान के लिए प्रेस्टीज अवार्ड से सम्मानित किया गया, जिनमें श्रीमती कंचन बाई को मरणोपरांत सम्मान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी, श्रीमती कंचन बाई, श्री लुंगी भुइयां, डॉ. मनमोहन जोशी, न्यायमूर्ति एच. पी. सिंह, श्री दामित गेहलोत, प्रो. (डॉ.) जी. एस. बाजपेयी, डॉ. प्रदीप कुमार राय, श्री यशवर्धन कुमार सिन्हा, सुश्री करिश्मा हाड़ा, सुश्री अनन्या नेगी, डॉ. संदीप मारवाह, डॉ. प्रदीप पगारिया और आचार्य डॉ. लोकेश मुनि को कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 300 व्यक्तियों को इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स अवार्ड 2026, नेशनल ह्यूमन राइट्स अवार्ड 2026 और स्टेट ह्यूमन राइट्स अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया।
अधिवेशन के सफल आयोजन में WHRRC की चेयरपर्सन डॉ. ज्योति जोंगलूजू, ब्रांड एंबेसडर करिश्मा हाड़ा, सचिव रश्मि बाला, सामाजिक न्याय प्रकोष्ठ के नेशनल चेयरपर्सन अशोक कुमार योगी, मीडिया प्रकोष्ठ के चेयरपर्सन डॉ. शूलपाणि सिंह तथा परिषद के अन्य पदाधिकारियों और सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आठ सत्रों के माध्यम से वैश्विक शांति, मानवाधिकार, महिला अधिकार, बंदियों के अधिकार, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को एक साझा मंच पर प्रस्तुत किया गया। अधिवेशन का मूल संदेश रहा कि मानवाधिकारों की वास्तविक रक्षा के लिए कानून, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और संस्थागत जवाबदेही को साथ लेकर चलना आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति को समानता, स्वतंत्रता, सुरक्षा, न्याय और मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकारों, न्यायिक संस्थाओं, शैक्षणिक संगठनों, नागरिक समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच निरंतर संवाद एवं सहयोग आवश्यक है।
